अविकसित राष्ट्र क्या है ? भारतीय राज्य के स्वरुप के मार्क्सवादी के विचार कुछ इस प्रकार है ? मार्क्सवादी के विचार?

 Q.1 भारतीय राज्य के स्वरुप के मार्क्सवादी  के विचार कुछ इस प्रकार है ?

भारतीय राज्य का स्वरुप :-


 भारतीय राज्य के स्वरुप के मार्क्सवादी  के विचार कुछ इस प्रकार है 

भारतीय राज्य का स्वरुप 

 कार्ल  मार्क्स एवं एंजेलस की अवधारणा राज्य  के स्वरुप के विषय  में भिन्न  है तथा यह प्रारभा से ही सार्थ विपरीत रहा है  भारत को आज़ादी वर्षो तक कठिन संघर्ष के उपरांत  1947  ई में प्राप्त हुई जेल्टन एवं जेआन ने इस प्रकास डालते हुए कहा है यथपि आज़ादी की लड़ाई 1857 ई के उपरांत ही अरंभा हुई  परन्तु ठीक एक वार्स के उपरांत ही इसकी वास्तविक शुरुआत हुई तथा भारत सरकार को 1858 ई का एक्ट प्राप्त हुआ एक्ट की करवट बदलने की िस्थति  इतनी माधियम एवं त्रित्व गति से हुई जिसके प्रतिफल स्वरुप 1861 ई तथा 1863 ई एक्ट के साथ ही 1857  ई का एक्ट एवं 1909  का एक्ट प्राप्त हुआ दुतीये विश्व युद्व के उपरांत आज़ादी को प्राप्त हुआ देशो को अविकसित राष्ट्रए अथवा देशो के शृंखला में रखा गया जिनसे अधिकांश एशिया अफ्रीका दक्षिणी अमेरिका के देश थे भारत भी अविकसित देशो की शृंखला में रखा गया इसकी तुलना किसी की जाती है इससे समझाना आवशयक है जिससे पाठ गण मन मार्चिका का शिकार न हो।


  Q.2 अविकसित राष्ट्र क्या है ?

अविकसित राष्ट्र:-

 यहाँ उस राष्ट्रए को कहा जाता है जिसमे जीवन िस्ठर कैसे निर्धारित किया जाये इसका निर्धारण करना आवशयक होता है तथा इसकी के साथ प्रत्येक मनुष्य भौतिक साधिये क्षमता  अथवा सामान्य शब्दो में  प्रतिवयक्ति आये कितनी हो और कितनी हो उसका निर्धारण कैसे हो तथा यहाँ कैसे निर्धारण की जाती है इसका निर्धारण किया जाता है कुछ देश इसके लिए अपवाद बना कर सामने आये जिसे न की अविकसित विकास शील एवं न ही विकसित राष्ट्रो के शृंखला  में रखा जा सकता है चीन इसका उद्धरण है जिसे  उन्मुखवादी देश के रूप में जाना जा सकता है जिसके अंतरगत सभी ततवों का संतुलित समावेश होना आवशयक होता है इन सभी ततवों के माधियम विकाश की गति अतीत होने से इन देशो में किसी न किसी प्रकार विकास अवरुद्ध होता रहा है इसके अनेक कारण है। 


सयुक्त राष्ट्रए संघ में सुधार की आवशकता है  की नहीं ?

संयुक्त राष्ट्रए संघ में समय पर सुधार करने की आवशकता है क्युकी संयुक्त राष्ट्रए संघ अनेक जगह में लगभग असफल रहा है क्युकी इसके जिसने भी अंग है  उन सभी में  सुधार करने की आवशकता है विशेस कर सुरक्षा परिषद में भी सुधार करने की आवशकता है ताकि वह नई सोच और विचार की आवशकता है परिषद को ताकि वह ाचा और बहुमूल्य निर्णय ले सके और सबका भला हो सके 

 


Leave a Comment

x