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अन्ना हजारे ने दिया बयान किसान के साथ ?और अरविन्द केजरीवाल ने भी दिया किसानो का साथ? अमित शाह ने दिया खुला एक्शन पुलिस को खली होना चाहिए सिंघु बॉर्डर ?

 दिल्ली एनसीआर :- अन्ना हज़ारे बड़ी मुश्किलों से आन्दोलन पुरुष अन्ना हज़ारे कुम्भकरण नींद से जागे हैं किसान आन्दोलन के दो महीने बाद श्री अन्ना हज़ारे को ये आभास हुआ है कि वो भी एक समाजसेवी, आन्दोलन कारी हैं. वैसे यदा कदा अन्नाजी किसान आन्दोलन पर अपनी प्रतिक्रिया देते रहे हैं. ये प्रतिक्रिया की क्रिया करने में अन्नाजी को दो महीने का समय लग गया, अच्छा हुआ नौ महीने का समय नही लगा. अन्ना हज़ारे ने भारत सरकार को चेतावनी दी है कि यदि किसानों की समस्या का समाधान जल्दी नहीं हुआ तो 30 January से वो अपने पुराने करेक्टर यानि आन्दोलन पुरुष के रूप में समाज के सामने आकर अपने आन्दोलन का श्री गणेश करेंगे.


एक तरफ 26 जनवरी पर दिल्ली में हुई हिंसा के बाद किसान आंदोलन खत्म होने की कगार पर है, किसान आन्दोलन की एकता अनेकता में बदल चुकी है कई किसान संगठन इस आन्दोलन से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं, अपने तम्बू उखाड़ चुके हैं और अपने ही सहयोगी किसान नेताओं को पछाड़ चुके हैं. मतलब ये किसान आन्दोलन लगभग मृत-प्राय हो चुका है ऐसे में गाज़ीपुर बोर्डर पर किसान नेता राकेश टिकैत के आंसुओं ने आंदोलन में एक नई जान फूंक दी है। इस बीच समाजसेवी अन्ना हजारे ने भी किसानों के समर्थन में उतरने का एलान कर दिया. इसलिए कहा है कि जागे मोहन प्यारे अन्ना हज़ारे. इसके लिए उन्होंने बापू की पुण्यतिथि यानी 30 जनवरी का दिन चुना है। दरअसल, इस दिन से अन्ना हजारे आमरण अनशन शुरू करेंगे. जब सरकार लाखों किसानों की भीड़ से नही मानी तो अकेले अन्नाजी के आन्दोलन करने से माँ जाएगी; एक बड़ा प्रश्न चिन्ह है. फिर भी कोशिश करने और करते हुए दिखने का सबको अधिकार है. भारत सरकार अन्नाजी के आन्दोलन में कूदने से थोडा परेशान दिख रही है इसलिए अन्ना को मनाने की कोशिश कर रही है और केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी रालेगण सिद्धि जा रहे है अन्ना हजारे अपने गाँव रालेगण सिद्धि स्थित यादव बाबा मंदिर में आमरण अनशन की शुरुआत करेंगे। अन्ना हजारे का कहना है कि वह साल 2018 से केंद्र सरकार से विनती कर रहे हैं कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके चलते उन्हें मजबूरन आमरण अनशन करना पड़ेगा इस मामले को सुलझाने के लिए कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर भी कमर कस चुके हैं। उन्होंने दिल्ली में देवेंद्र फडणवीस और गिरीश महाजन से मुलाकात कर एक ड्राफ्ट तैयार किया, जो अन्ना हजारे को दिया गया है। अन्ना इस ड्राफ्ट की कमियों की जानकारी देंगे। अगर सरकार इन कमियों को दूर करने पर हामी भरती है तो अन्ना अपना अनशन वापस ले सकते हैं। मतलब जागे मोहन प्यारे के पूरी तरह जागने में संशय है. देखते हैं अन्ना हज़ारे अपनी पुरानी भूमिका में कब नज़र आते हैं. देश वासी अन्नाजी के जन लोकपाल वाले रूप को देखने के लिए बेताब हैंक्या किसान को मिल पाएगा न्याय कमेंट में हमें यहाँ बताये की सरकार सही है या किसान। 

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