अयोधिया में मस्जित के लिए राखी नीव ? श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने के कार्य का श्री गणेश हो गया है ?2021

 अयोधिया में मस्जित के लिए राखी नीव 

धर्म भूमि अयोध्या पर अब धर्म के प्रचार प्रसार का समय आ गया है सदियों के वाद विवाद के बाद अयोध्या की पुण्यभूमि हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल बनने जा रही है एक ओर जहाँ श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने के  कार्य का श्री गणेश हो गया है वहीं दूसरी तरफ मुसलमानों के लिए एक शानदार मस्जिद बनाने के लिए उसकी संगे बुनयाद रखी गई है । मस्जिद की बुनियाद कल 26 जनवरी दिन रखी गई है जिस दिन हमारा संविधान लागू हुआ उसी संविधान दिवस के दिन मस्जिद की तामीर का काम शुरू किया गया है मंदिर मस्जिद का निर्माण कार्य जन्मभूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही शुरू हो सका है।   कोर्ट ने आदेश से अयोध्या विवाद में मुस्लिम पक्ष सुन्नी वक्फ बोर्ड को बाबरी मस्जिद से 25 किलोमीटर दूर अयोध्या की सोहावल तहसील के धनीपुर गांव में 5 एकड़ भूमि आवंटित की थी। अयोध्या (Uttar Pradesh)। अयोध्या में कल गणतंत्र दिवस के मौके पर मस्जिद निर्माण का सांकेतिक शिलान्यास किया गया। इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के अध्यक्ष जुफर फारूकी उनके अलावा दुसरे खुसूसी महमानों ने मस्जिद की जगह पर पौधे लगाये.. तिरंगे की परचम कुशाई की और मुस्लिम बच्चों के साथ कौमी तराना यानि  राष्ट्रगान को सबने मिलकर गायाअयोध्या में बन्ने वाली मस्जिद का तामीरी नक्शा कुछ इस तरह से होगा मस्जिद में दो फ्लोर होंगे  इसमें औरतों के लिए नमाज़ पढने, इबादत करने की अलग जगह होगी  इस मस्जिद में एक साथ 2 हजार लोग नमाज़ पढ़ सकेंगे। ये मस्जिद सिर्फ नमाज़ पढने के लिए नहीं होगी बल्कि इसमें और भी कई कौमी मज़हबी काम करने की जगह होगी जैसे मस्जिद में म्यूजियम, लाइब्रेरी और एक कम्युनिटी किचन भी बनेगा।

इसी मस्जिद की जगह में एक हॉस्पिटल होगा जो 24 हजार 150 स्क्वायर मीटर में बनाया जाएगा।इस हॉस्पिटल में 200 से 300 बेड होंगे और ये हॉस्पिटल सभी धर्मों के लोगों का पूरी तरह फ्री इलाज करेगा जानकारी के मुताबिक इस  हॉस्पिटल पर करीब 100 करोड़ रुपए का खर्च आ सकता है। 26 जनवरी से यहां की पांच एकड़ जमीन पर ग्रीनरी प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया जाएगा। मस्जिद परिसर में देश विदेश के पौधों जिसमें अमेजन के जंगलों व आस्ट्रेलिया से लेकर अन्य देशों व भारत के विभिन्न प्रांतों के पौधों को लगाया जायेगा इस मस्जिद का डिज़ाइन अभी तक की सभी मस्जिदों से अलग होगा इस मस्जिद में बहुत सी खूबियाँ होंगी जैसे कि मस्जिद में गुम्बद नहीं होगा। इमारत ईको-फ्रेंडली होगी और इसमें सोलर एनर्जी का इस्तेमाल किया जाएगा।

ख़बरों के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश के अयोध्या में यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड की ओर से ट्रस्ट “इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन” (IICF) ये फैसला ले सकता है कि इस मस्जिद को महान स्वतंत्रता सेनानी मौलवी अहमदुल्ला शाह को के नाम पर रखा जाए वैसे यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने मस्जिद किसके नाम पर होगी इस पर अभी तक कोई अधिकारिक बयान नहीं दिया है. लेकिन ट्रस्ट के सचिव अतहर हुसैन के मुताबिक ट्रस्ट ने ये फैसला लिया है कि मस्जिद को किसी भी मुगल बादशाह के नाम से नहीं जोड़ा जाएगा. इसीलिए अब अहमदुल्ला शाह के नाम पर ये मस्जिद हो सकती है.अब सवाल ये उठता है की ये अहमदुल्लाह शाह कौन है..तो तारीख़ के आईने में देखकर बताते हैं कि. कौन हैं अहमदुल्ला शाह  भारत की पहली स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई (1857) में अवध का प्रतिनिधित्व करने वाले मौलवी अहमदुल्ला शाह ने भारत की अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में काफी अहम भूमिका निभाई थी. उन्हें हिन्दू-मुस्लिम एकता की अवध में नींव सींची थी. जब पूरा भारत अंग्रेजों की गुलामी से चुप था, तब भी अहमदुल्ला शाह अंग्रेजों से अकेले लोहा लेते थे.

जब 1857 में भारत अपनी स्वतंत्रता की पहली लड़ाई लड़ रहा था. तो अवध को जीत दिलाने के लिए अब्दुल्लाह शाह ने जिम्मा उठाया था. किताब-‘भारत में अंग्रेजी राज’ में प्रतिष्ठित लेखक सुंदरलाल ने लिखा है कि ‘बगावत की जितनी अच्छी तैयारी अवध में थी, वो कहीं और नहीं देखी गई. जब भारत की बगावत के बाद ब्रिटिश सरकार ने बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार कर लिया था तब भी उसके अगले साल मार्च तक अब्दुल्लाह शाह लखनऊ में ब्रिटिश सेना का सामना कर रहे थे और उन्हें माकूल जवाब दे रहे थे

मौलवी अहमदुल्ला शाह की कर्मभूमि फैजाबाद रही इसलिए कभी-कभी उन्हें अहमदुल्लाह शाह फैजाबादी भी बुलाते थे लेकिन वो कहां जन्मे थे ये कोई नहीं जानता था. कोई उन्हें दक्षिण से आया बताता था तो कोई उन्हें घूमता रहने वाला फकीर.अंग्रेज उन्हें ‘फौलादी शेर’ कहते थे कहते हैं कि कई मोर्चों पर जब भी अंग्रेजी हुकूमत को अब्दुल्ला शाह के खिलाफ आगे बढ़ना होता था, तो उन्हें उसके लिए लाशों पर से गुजरना पड़ता था. जिसके बाद से अंग्रेजों ने मौलवी अहमदुल्ला शाह को ‘फौलादी शेर’ बुलाना शुरू कर दिया. अंग्रेजों को पता था कि दुर्भाग्यपूर्ण उनका यह शत्रु जनता का प्रिय आदमी है

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