किसान को दो न्याय ?अब अन्ना हज़ारे देंगे किसानो का साथ ?

किसान को दो न्याय ?

अब अन्न हज़ारे देंगे किसानो का साथ ?

जैसे की हम सब जानते है की किसानो को 2 महीने से ज्यादा हो गए है और अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया तो कोई तो होगा जो किसानो का न्याय दिला सके जन आन्दोलन का दूसरा नाम अन्ना हज़ारे ये उस समय की बात है जब अन्ना हज़ारेजन-समस्याओं के लिए जागरूक और चिंतित हुआ करते थे सरकार कोई भी हो कितनी भी ताकतवर हो अन्ना हमेशा सत्य का पक्ष लेकर उन मज़बूत सरकारों से टकरा जाया करते थे अन्ना का गाँव रालेगण सिद्धि जन आन्दोलन के सिद्ध स्थान माना जाता था अन्ना हज़ारे की समाजसेवी और जन-नायक की भूमिका देश में रच-बस गए. आगे चलकर अन्ना हज़ारे जन आन्दोलन का प्रतीक बन गए. अन्ना ने सिर्फ आन्दोलन नहीं किये बल्कि अपने के आंदोलनों सामाजिक क्रांति और राजनैतिक क्रांति भी लाये हैं. अरविन्द केजरीवाल इस राजनैतिक क्रांति का प्रतिफल है. अन्ना का जन-लोकपाल और इंडिया अगेंस करप्शन आन्दोलन को कौन भूल सकता है इसी आन्दोलन से कांग्रेस की मज़बूत सरकार कमज़ोर होकर धराशायी हो गई और इसी जन-लोकपाल आन्दोलन से भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी के अच्छे दिनों की शुरुआत हुई थी. अन्ना के जन-लोकपाल आन्दोलन ने देश में जागरूकता पैदा की कि पूरा देश सड़क पर आ गया. सबने अन्ना का समर्थन किया और आन्दोलन अपने सफलता के शिखर पर पहुँच गया. जन-लोकपाल बिल पास हुआ और अन्ना हज़ारे आन्दोलन को पूर्णाहुती मिली. आन्दोलन खत्म हुआ और अन्ना हज़ारे ख़ामोश. तब से अब तक देश कई जटिल समस्याओं से गुज़र चुका है जन-आन्दोलन के कई अवसर सामने से निकल चुके हैं लोकपाल बिल पास होने बाद फेल भी हो चुका है जिस भारतीय जनता पार्टी ने संसद में लोकपाल बिल के समर्थन में बड़े बड़े नारे लगाये थे जोशीले भाषण दिए थे सत्ता परिवर्तन यानी भारतीय जनता पार्टी के शासन में आने बाद वही लोकपाल पास होकर भी संसद के किसी कोने में पडा रहा फायलें धूल खाती रहीं लेकिन मोदी सरकार ने लोकपाल बिल को रूप नहीं दिया, लोकपाल की नियुक्ति नहीं की. ये सब कुछ होता रहा लेकिन अन्ना जी अपने रालेगण सिद्धि में समाधि लगाये मौन बैठे रहे. तब से अब मौन ही बैठे हैं उनका ये मौन कब टूटेगा अन्नाही जानें. आज के समय आज के लोगों के लिए अन्ना हज़ारे की इस भूमिका को बताना ज़रूरी है. आज देश का किसान आन्दोलन के सड़कों पर है मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलित है किसान अपने परिवार के साथ खेतों से सड़कों पर आ गया है. इस आंदोलित किसानों को पूरा देश समर्थन दे रहा है ऐसे में आन्दोलन-पुरुष अन्ना हज़ारे जी अदृश्य हैं,गायब हैं, गुमशुदा हैं.. ऐसे गुमशुदा आन्दोलन-कारी को देश ढूंढ रहा है. दिल्ली का रामलीला मैदान अन्ना की बाट जोह रहा है. अन्ना के साथी योगेन्द्र यादव जैसे कर्मठ व्यक्ति अन्ना को आवाज़ दे रहे हैं. अन्ना के शिष्य अरविन्द केजरीवाल भी याद कर रहे हैं लेकिन अन्ना हैं कि सामने आने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. कहाँ छुपे हैं क्यों छुपे हैं अब ये शोध का विषय बनता जा रहा है. वैसे किसानों ने अन्ना की प्रतीक्षा कभी नहीं की और अपना आन्दोलन शुरू कर दिया. अब अन्ना की बारी है कि जहाँ भी जिस भी समाधि में हैं वहाँ से निकलकर किसान आन्दोलन के कुछ बोले. वैसे कुछ दिन पहले ये खबर आई थी कि अन्ना ने सरकार को एक पत्र लिखकर किसानों के प्रति अपनी चिंता ज़ाहिर की है अन्ना ने मोदी जी पत्र लिखकर कहा है कि यदि सरकार ने जल्दी ही किसानों की समस्या का समाधान नहीं किया तो वो दिल्ली आकर किसानों के पक्ष में आन्दोलन करेंगे. मोदी सरकार ने अन्ना के इस पत्र को कितनी गंभीरता से लिया है ये तो समय ही बताएगा. लेकिन इस समय किसान आंदोलित है अन्ना जी शांति से अपने गोँव में बैठे हैं. बहरहाल अन्ना हज़ारे जब भी कभी किसानों के समर्थन में दिल्ली आयेंगे और आन्दोलन करेंगे उस समय हम यही कहेंगे हुज़ूर आते आते बहुत देर कर दी और अगर  आपको ऐसी की जानकारी चाहिए तो हमें फॉलो करे 

Leave a Comment

x