किसान -पुलिस के टकराव में एक की मौत 100 घायल

 किसान आन्दोलन 


 नई दिल्ली NCR किसान की ट्रैक्टर रैली के चलते 100 घायल और कई लोगो की मौत हुई है ट्रैक्टर की रोकने के चलते कई पुलिस कर्मी रोकने के लिएआगे आये तो किसान बेरिकेट तोड़ कर भागने की कोशिश में एक पुलिस कर्मी बहुत बुरी तरह दुर्घटना ग्रस्त हो गया और 100 से ज्यादा लोग भीड़ में लपेटे में आने के चलते भी घायल हुए 

 लाल किले पर किसान दंगे करते हुए 

नए कृषि कानूनों की मुख़ालफ़त कर रहे किसानों ने मंगलवार को देश की राजधानी दिल्ली में जमकर उत्पात मचाया और हिंसा को अंजाम तक पहुंचाया. उग्र किसान लाल किले तक पहुंच गए और उत्पात मचाते हुए उसकी  प्राचीर पर अपना धार्मिक झंडा जिसे निशान साहेब कहते हैं वही झंडा फहरा दिया. किसानों की डराने और शर्मिंदा करने वाली इस रैली के बाद किसान नेता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) का बयान सामने आया है कि ये सब कुछ कुछ ऐसे संगठनों द्वारा किया गया है जो इस आंदोलन को खत्म करना चाहते हैं और आंदोलन के खत्म होने से संगठन को फायदा होगा या सरकार को ये बात सब जानते हैं दिल्ली की हिंसा, किसानों का एक सोची समझी साज़िश का हिस्सा है उन्होंने कहा कि किसानों को प्लान बनाकर फंसाया गया है. 

गणतंत्र दिवस (Republic Day 2021) के दिन आंदोलनकारी किसानों की ट्रैक्टर परेड (Tractor Parade) के दौरान बड़ी संख्या में उग्र प्रदर्शनकारी बैरियर तोड़ते हुए लाल किले तक पहुंच गए और उसकी प्राचीर पर उस स्तंभ पर एक धार्मिक झंडा लगा दिया, जहां 15 अगस्त को प्रधानमंत्री भारत का तिरंगा फहराते हैं. लाल किले में घुसे प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया और टिकट काउंटर में भी तोड़फोड़ की. पुलिस ने रात करीब साढ़े 10 बजे तक प्रदर्शनकारियों से लाल किला को खाली कराया और धार्मिक झंडे को भी हटा दिया. हजारों प्रदर्शनकारी कई स्थानों पर पुलिस से भिड़े, जिससे दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी.


लेकिन राकेश टिकैत और अन्य किसान नेताओं की बात या इस आरोप को सरकार सिरे से नकार रही है पुलिस की उच्च स्तरीय जांच शुरू हो गई है अभी तक दिल्ली हिंसा के खिलाफ 22 FIR लिखी जा चुकी हैं पोलिस के मुताबिक अभी FIR की गिनती और बढ़ सकती है पुलिस cctv की गहन जांच कर रही है मोबाइल फुटेज भी खंगाली जा रही है किसानों के इस action के बाद पुलिस के reaction से यही अंदाज़ा लगता है कि अब उन हिंसा फैलाने वालों की ख़ैर नहीं है और उन उपद्रवियों की खैर होना भी नहीं चाहिए जिन्होंने दिल्ली को दहला दिया है भारत की आन बान शान का प्रतीक हमारा तिरंगा और लाल किला का अपमान किया है दिल्ली को दंगे देखने का पुराना अनुभव है लेकिन उन दंगों के दौरान भी लालकिला और तिरंगा का अपमान कभी नहीं हुआ ये इतिहास का काला दिन बनकर याद रहेगा इसलिए इस काले इतिहास को लिखने वालों को भी कठोर दंड मिलना चाहिएएक तरफ हिंसा की जांच चल रही है दूसरी तरफ इस पक्ष-विपक्ष की गंदी राजनीति भी शुरू हो गई है आरोप प्रत्यारोप के पत्थर दोनों तरफ से फेके जाने लगे है

किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा- हिंसा के लिए केंद्र-यूपी सरकार जिम्मेदार  भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने ट्रैक्टर परेड के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर आरोप लगाते हुए कहा, ‘हिंसा केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नाकामी है. किसानों को प्लान बनाकर चक्रव्यूह में फंसाया गया है.’ इस हिंसा से हम दुःखी हैं लेकिन हमारा आंदोलन समाप्त नहीं होगा.कृषि कानूनों के खिलाफ जारी रहेगा किसानों का प्रदर्शन।

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कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हैं किसान नए कृषि कानूनों (New Agriculture Laws) के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) पिछले 63 दिनों से जारी है और किसान लगातार तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के लिए कानूनी गारंटी दी जाए और तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए.

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