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upcoming space missions of ISRO in 2021

वैसे तो भारत के इसरो ने काफी मिसाइल भेजी है अतरिक्ष में पर इस बार भारत पूरी तरह से तैयार है भारत के 6 मिशन है जो की भारत को करना है उसी के बारे में हम आपको बतायेगे की भारत कौन से मिशन पर काम कर रहा है covid 19 की वजह से पूरी दुनिया में इस बार अतरिक्ष का कोई भी कार्यकर्म नहीं किया गया है इसका मतलब यहाँ की की वैज्ञानिक हाथ पर हाथ रखा कर बैठे है भारत के वैज्ञानिक ने 2021 की पूरी तैयारी करि है इस साल भारत 6 मिशन पर काम कर रहा है जो की पूरी दुनिया के लिए एक रिकॉर्ड और संजीवनी बूटी हो सकती है आखिर वह 6 मिशन कौन से है वो हम आपको बताते है। 

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1.गगनयान मिशन :-अतरिक्ष पर मानव की खोज 

गगनयान की पहली उड़ान दिसम्बर 2020 में और दूसरी उड़ान जुलाई 2021 में प्रस्तावित थी लेकिन कोविड के कारण ये उड़ाने स्थगित करनी पड़ी है अब पहली उड़ान 2021 और दूसरी उड़ान 2022 में होगी इस उड़ानों में इसरो दुवरा विकसित हार्मोनाइट रॉबर्ट  व्योममित्र को भेजा जाएगा इस दोनों मानवरहित उड़ानों का लक्ष्य पृथ्वी की समीप का कक्षा में दो या तीन व्योमनॉट अतरिक्ष यात्री को भेजकर उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने की तकनीक का प्रदर्शन करना होगा हमें विस्वास है की  गगनयान भारत का पहला मानव अतरिक्ष मिशन होगा। इन दोनों उड़ानों की सफलता पर ही यहाँ मानव मिशन निर्भर करेगा जो 2022 में होने की संभावना है इसके लिए भारतीय वायुसेना के चार पायलटो का चयन किया गया है जिनकी ट्रेनिंग रूस से चल रही है। 

2. चंद्रयान -3 मिशन :- पानी की खोज 

चंद्रयान -2 की सॉफ्ट लेंडिंग की असफलता के कारण चंद्रयान -3 मिशन की तैयारी शुरू की गयी है चंद्रयान -2 की लैंडिंग भले ही विफल हो गयी हो लेकिन उसके साथ भेजा गया ऑर्बिटर अभी काम से काम 6 से 7 साल तक और काम करेगा इस कारण चंद्रयान -3 के लिए ऑर्बिटर की जरुरत नहीं होगी उसके लैंडर और रोवर को ही संभावित इसी साल के अंत तक चन्द्रमा के दक्षिण धुर्व आईटकेन बेसिन पर उतारा जाएगा इसकी तारीख की घोषणा का इंतजार है चंद्रयान -3 के लैंडर और रोवर जहाँ उतरेंगे वहां खासकर उसकी सतह पर बर्फ या पानी काफी मात्रा में मिलने की उम्मीद है इसका पता रोवर में लगे उपकरणों से लगया जाएगा इस खोज से भविष्य में चाँद पर मानव को बसाने की सभावना बढ़ जाएगी  हमें उम्मीद है की साल 2008 में लांच किये गया प्रथम चंद्रयान मिशन ने चाँद पर पानी की संभावना की उम्मीद जताई थी। 

3. मिशन वीनस :- शुक्रयान गृह की जानकारी 

इसके तहत शुक्र की कक्षा में शुक्रयान -1 उपग्रह भेजा जाएगा जो वही चार साल तक कार्य करेगा और शुक्र गृह की जानकारी इखट्ट करेगा इसके लिए यंत्रो के विकास पर कार्य करना शुरू कर दिया गया है इस योजना में रूस , फ़्रांस , जर्मनी और स्वीडन भी भाग लेंगे शुक्रयान-1 के जून 2023 तक लॉन्च करने की योजना है लेकिन  यदि उसे समय लॉंच नहीं किया जा सका तो फिर शुक्र के पृथ्वी के नजदीक होने का समय 19 महीने बाद आएगा यानि फिर लौन्चिंग साल 2025 तक ताल जाएगी। 

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4.आदित्य एल :- सूरज का अध्ययन

सूरज का अध्ययन करने के लिए यहाँ इसरो और भारत का पहला मिशन होगा पहले इसकी उड़ान साल 2020 में प्रस्तावित थी लेकिन अब 2022 तक इसे लॉंच किए जाने की योजना है यहाँ वैज्ञानिक दृस्टि से एक अनोखा प्रयोग होगा इसके तहत 400 किलोग्राम भार का एक उपग्रह लैग रेंज पॉइंट 1′ L-1 पर स्थपित किया जाएगा जिसकी दुरी पृथ्वी से करीब 15 लाख किलोमीटर है वहां से उस उपग्रह पर लगे उपकरण ग्रहण की अवस्था के दौरान भी बगैर बाधा के लगातार सूर्य का परीक्षण कर सकेंगे। 

5.एस.एस.एल.वी.का विकास :- 

छोटे व कम भार के उपग्रहों का परीक्षित करने के लिए एस.एस.एल.वी. स्माइल सेटलाइट लॉंच विकल के विकास का काम भी चल रही है इस रॉकेट से 500 किलो तक भार के उपग्रह पृथ्वी की पास की कक्षा में और 300 किलो तक भार के उपग्रह सं इसक्रोनस कक्षा में छोड़े जा सकेंगे इसकी पहली डेवलपमेंट उड़ान मार्च 2021 तक होने की उम्मीद है इसके लिए अलग से लॉंच लॉन्चपैड निर्मित करने की तैयारी है भविष्यमें तूतीकोरिन जिले के कुलसकरापात्मान में बन रहा नया स्पेसपोर्ट उपग्रहों की लॉंचिग के लिए उपयोग में आएगा उपग्रहों के परीक्षण के लिए बनाई गयी प्राइवेट कंपनी न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड एस.एस.एल.वी.के उत्पादन और लौन्चिंग का काम करेगी।

6. री-रोकट का फिर से इस्तिमाल 

आर एल वी  यानि रियोजेबल लॉंच व्हीकल वहां रॉकेट होगा जो उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में भेजकर वापस आ जाएगा और उसका फिर से दूसरे उपग्रहों को प्रशिक्षण करने में उपयोग किया जा सकेगा इसके एक प्रोटोटाइम मॉडल दो स्टेज वाले रॉकेट और एयरोप्लेन टाइम वाले मॉडल का प्रशिक्षण साल 2016 में किया जा चूका है अब इसी साल यानि 2021 में एयरोप्लेन टाइम मॉडल के दूसरे स्टेज का प्रशिक्षण लैंडिंग गियर के साथ चितदुर्गा के चालकेरे रन वे पर हेलीकाप्टर से चार किमी की उचाई से ड्राप करके किया जाएगा इसके बाद रेक्स यानि पृथ्वी की कक्षा से सुरसित वापस लाने री एंट्री  का प्रशिक्षण किया जाएगा साथ ही उसे स्क्रैपजेट पापुलेशन इंजन के परीक्षण  को योजना पर भी जल्दी काम शुरू होगा। 

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